यूएलबी ने हिसार, रोहतक व गुड़गांव के इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के उन दुकानदारों की मांगी डिटेल जिन्होंने ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट बिना शुरू किया व्यवसाय, मिल सकती है एक्सटेंशन फीस में छूट

  • तीनाें जगहों से यूएलबी ने 15 दिन के अंदर-अंदर रिपाेर्ट मांगी

दैनिक भास्कर

May 04, 2020, 06:47 AM IST

डबवाली. इंप्रूवमेंट ट्रस्ट की जमीनाें पर बिना कंप्लीशन सर्टिफिकेट व अाॅक्यूपेशन सर्टिफिकेट बनाई दुकानाें के मामले में व्यापारियाें काे जल्द राहत मिल सकती है। यूएलबी ने हिसार, रोहतक व गुड़गांव के कमिश्नर काे लेटर भेजकर इंप्रूवमेंट ट्रस्ट यानी नगर सुधार मंडल की उन दुकानाें की डिटेल मांगी है जिनका अाॅक्यूपेशन सर्टिफिकेट व कंप्लीशन सर्टिफिकेट अभी तक मालिकाें ने नहीं लिया है।
यूएलबी ने 15 दिन के अंदर रिपाेर्ट मांगी है। इस मामले में तीन सदस्यीय कमेटी जांच कर रही है। तीनाें जिलाें के केस तैयार कर ये रिपाेर्ट जल्द ही सरकार के पास भेजी जाएगी। इसके आधार पर पाॅलिसी में बदलाव भी किया जा सकता है। संभावना जताई जा रही है कि कंप्लीशन की डेट यानी जिस दिन से बिल्डिंग बनाई उसकी असल तारीख से एक्सटेंशन फीस में छूट मिल सकती है।

अभी तक ये पड़ रहा है असर : नगर सुधार मंडल के बिना कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी हुए प्लॉट मकान या दुकान की सेल-परचेज, नेम ट्रांसफर और नक्शे पर रोक है। जिसका सीधा असर शहर की इन तीनाें जिलाेें में पड़ी हजाराें प्रॉपर्टीज पर पड़ रहा है। जिनमें से करीब नब्बे फीसदी ने कंप्लीशन सर्टिफिकेट नहीं लिया है। नगर सुधार मंडलाें की कराेड़ाें रुपये की आय पिछले दाे साल से भी ज्यादा समय से रुकी हुई है।

जानिए… 50 साल बाद कैसे हुआ खुलासा, नगर सुधार मंडल को कितनी हो सकती है आय

नगर सुधार मंडल के अधिकारियों की मानें तो अक्टूबर 2018 में ये मामला सामने आया था। ऑडिट ने ऑब्जेक्शन लगाया कि नगर सुधार मंडल जो भी सेल परचेज के केस आ रहे हैं। उनका रिकॉर्ड ये भी चेक किया जाए कि कंप्लीशन सर्टिफिकेट कब लिया गया। यानी कहा कि जिन प्लॉटों के कंप्लीशन सर्टिफिकेट नहीं लिए हैं उनसे एक्सटेंशन फीस वसूली जाए। अधिकारियों ने जब रिकॉर्ड खंगाला कि इनमें से किसी ने कंप्लीशन सर्टिफिकेट ही नहीं लिया था। ऐसे में शोरूमों, दुकानों व मकानों के करोड़ों रुपये एक्सटेंशन फीस में रूप में बनते हैं। ऑडिट के बाद नगर सुधार मंडल में सेल परचेज की फाइलों पर नो ड्यूज के ऑब्जेक्शन लगा दिए कि वे एक्सटेंशन फीस जमा कराएं।

ये भी जानें… कब बना नगर सुधार मंडल और कब बनी राजगुरु मार्केट और ऑटो मार्केट

नगर सुधार मंडल का गठन 1969 में हुआ था। इसके बाद हिसार जिला में 1972 से लेकर 1975 के बीच राजगुरु मार्केट, पुरानी ऑटो मार्केट सहित कई एरिया सुधार मंडल ने बसाए। मॉडल टाउन एरिया, भगत सिंह चौक, ग्रीन पार्क एरिया, जिंदल चौक के पास का एरिया, पुरानी क्लाथ मार्केट सहित लगभग पुराना शहर नगर सुधार मंडल की अलग-अलग स्कीम के तहत बसाया गया है। इन सभी एरिया में 4 हजार से अधिक प्लॉट होल्डर्स हैं। अकेले ऑटो मार्केट में ही साढ़े 700 से अधिक प्लॉट हैं। इसी तरह अन्य शहराें में भी नगर सुधार मंडल ने मार्केट व रेजिडेंशियल एरिया बसाए हैं।

पढ़िए… इसलिए उठी पाॅलिसी मैटर बदलने की मांग

सेल-परचेज के मामलों में जब व्यापारी या रेजिडेंट्स अपने पुराने समय के बिजली पानी या हाउस टैक्स का सबूत लेकर जाते तो भी अधिकारी अलॉटमेंट के बाद से लेकर अब तक की एक्सटेंशन फीस कैलकुलेट कर नो ड्यूज क्लियर करने की बात कहते थे। क्योंकि सुधार मंडल की पॉलिसी में ऐसा नहीं है कि वे बिजली-पानी के कनेक्शन के टाइम को सबूत के तौर पर यूज करें। हालांकि हुडा में ऐसा मान्य है। अगर किसी ने कंप्लीशन सर्टिफिकेट नहीं लिया तो बिजली, पानी या हाउस टैक्स बिल के आधार पर उससे आगे की एक्सटेंशन फीस माफ कर दी जाती थी और उसे कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी किया जाता है। मगर यहां नगर सुधार मंडल की पॉलिसी में ऐसा नहीं है। मामला जब उठा ताे इस पाॅलिसी में बदलाव की मांग की गई।

मई 2019 में हुई थी मुख्यालय में बैठक भी

पॉलिसी में कुछ बदलाव करवाने के लिए अधिकारियाें की मई 2019 में मुख्यालय में बैठक हुई थी। इसमें हिसार से डीएमसी को बुलाया गया था। बैठक में पाॅलिसी में कुछ क्लाज बदलने काे लेकर चर्चा हुई थी। उच्च अधिकारियाें की एक कमेटी से इस पूरे मामले काे देखने व क्या बदलाव किए जा सकते हैं, इसके सुझाव मांगे थे। कई शहराें के हाउस से भी रेज्यूलेशन पास करवाकर सरकार के पास भिजवाया गया था कि पाॅलिसी में बदलाव किया जाए।