दमकल कर्मी आग बुझाने के साथ-साथ शहर को कर रहे सेनिटाइज

  • महामारी के चलते जिले के फायर ब्रिगेड स्टेशन पर 5 कर्मचारी 24 घंटे कर रहे ड्यूटी

दैनिक भास्कर

May 04, 2020, 06:53 AM IST

सिरसा. काेराेना महामारी के चलते जिला में 40 दिनों से लगे लॉकडाउन में ज्यादातर लाेग अपनों के बीच समय बीता रहे हैं। वहीं जरूरत के मुताबिक फायर फाइटरों ने भी अपनी भूमिका बदल ली है।
जिले में कहीं भी आग लग जाए ताे कुछेक समय में माैके पर पहुंच आग पर काबू पाने के साथ-साथ फायर फाइटर शहर काे सेनिटाइजर करने का भी काम कर रहे हैं। कोरोना के खिलाफ लड़ाई में डाॅक्टराें, पुलिस जवानाें व सफाई कर्मियों के साथ फायर ब्रिगेड के कर्मचारी भी किसी से पीछे नहीं हैं।कोरोना वायरस के बचाव को लेकर इस समय फायर ब्रिगेड कोरोना की लड़ाई में अहम रोल निभा रहे हैं। इस लड़ाई में साथ दे रहे हैं फायर ब्रिगेड के 25 कर्मचारी जो 24 घंटे फायर स्टेशन पर ऑन ड्यूटी हैं।

वहीं जिस कैमिकल से शहर को सेनिटाइजर किया जा रहा है। उससे शरीर झुलसने का सबसे ज्यादा खतरा है। अपनी जान की परवाह किए बगैर लोगों की सेवा में लगे हुए हैं। सभी फायर कर्मचारी इस समय बिना पीपीटी किट के काम कर रहे हैं। सभी की मांग है कि उन्हें पीपीटी किट के साथ-साथ सेनेटाइजर, हाथ धोने के लिए साबुन दिलाई जाए, ताकि वे पूरी तरह से सुरक्षित रह कर सिरसा वासियों की रक्षा कर सकें और अपने परिवार को भी सुरक्षित रख सकें।

हर तरह के खतरे में हम सबसे आगे

लीडिंग फायरमैन सुखदेव सिंह ने बताया कि उनका बेटा और खुद दोनों जब रात्रि को घर पहुंचते हैं तो दरवाजे पर ही उनकी पत्नी दोनों को सेनेटाइजर करती है। उसके बाद वे नहाने के बाद ही परिवार के साथ खाना खाते हैं। घर पर सोशल डिस्टेंस का पूरा ध्यान रखते हैं। उनका बेटा भी गुरुद्वारा की लंगर सेवा में दिनरात जुटा हुआ है। वे प्रतिदिन 8 घंटे ड्यूटी करते हैं और पूरे शहर को सेनिटाइजर करने में जुटे हुए हैं।

वीडियो कॉल ही कर लेता हूं

फायरमैन हरजिंद्र सिंह ने बताया कि कोरोना महामारी के कारण वह एक माह से घर नहीं गए। परिवार गांव में है। वे ड्यूटी के बाद फायर स्टेशन में ही सोते हैं ताे बेिटयों की याद आती है। अब ताे कई-कई दिन बाद बात हो पाती है। वीडियाे काॅल करके बेटी से बात करता हूं तो मन को शांति मिलती है। काेराेना वायरस का संकट बड़ा है। हमारे कंधाें पर लाखाें लाेगाें की सुरक्षा का जिम्मा है।

लाखाें लाेगाें काे बचाने की जिम्मेदारी
लीडिंग फायरमैन सज्जन कुमार ने बताया कि वे अधिकतर फायर स्टेशन में ही रहते हैं। दो हफ्तों से वे घर नहीं गए। जब घर जाते हैं तो परिवार से अलग ही छत पर कमरे में रहते हैं और खाना भी अलग खाते हैं। कोरोना महामारी काे हराने का फर्ज उनके लिए सबसे पहले है। हमारे कंधाें पर लाखाें लाेगाें काे बचाने की जिम्मेदारी है। वे 8 घंटे ड्यूटी करते हैं। शहर को सेनिटाइजर करने में जुटे हुए हैं।

1 माह से परिवार के बीच नहीं गया

फायरमैन सुरेंद्र पाल ने कहा कि वे गांव केसूपुरा के रहने वाले हैं। परिवार गांव में ही रहता है पर एक माह से उनके बीच नहीं गया। जब गांव में जाता हूं तो परिवार से मिलने से पहले नहाता हूं। उसके बाद सोशल डिस्टेंस बनाकर बच्चों से बातचीत करता हूं। डयूटी दौरान बच्चे भी फोन व वीडियो कॉल करके सुरक्षित रहने का हौंसला देते रहते हैं। कोरोना को हराना व लोगों की सुरक्षा करना हमारा पहला धर्म है।