ग्रामीण बोले-कुछ कर्मी मिंट फैक्ट्री में सेनिटाइजर बनने की बात कहते थे फैक्ट्री संचालक बोले-सेनिटाइजर नहीं हमारा केमिकल रिफाइन का काम

नारायणगढ़. जटवाड़ की मिंट लाइफ साइंस केमिकल फैक्ट्री से 15 घंटे बाद भी सोमवार को धुआं निकलता रहा। फैक्ट्री का परिसर करीब 3 एकड़ का है। फैक्ट्री को लेकर दो तरह की बात सामने आ रही हैं। आसपास के ग्रामीणों का कहना है कि फैक्ट्री में लॉकडाउन के दौरान भी कैमिकल का काम चल रहा था। रविवार रात को भी फैक्ट्री में काम करने वाले लोग मौजूद थे। जो सोमवार की सुबह यहां से चले गए।
फतेहगढ़ की सरपंच के प्रतिनिधि विक्रांत शर्मा ने बताया कि लॉकडाउन में ग्रामीणों ने नाका लगाया हुआ था। किसी को भी गांव में एंट्री नहीं करने दी गई, लेकिन तसड़ौली की तरफ से हर रोज 5-6 लोग इस फैक्ट्री में काम करने आते थे। जब उन्हें रोककर पूछा जाता था कि कहां जा रहे हो तो वह सेनिटाइजर फैक्ट्री में जाने की बात करते थे। इसलिए उन्हें आने जाने दिया गया था, क्योंकि सेनिटाइजर की देश को जरूरत है। दूसरी तरफ फैक्ट्री के केयर टेकर सुचित गुप्ता का कहना है कि यहां किसी भी तरह का निर्माण या मैन्युफेक्चरिंग नहीं चल रही थी। यहां मिक्स कैमिकल का स्टॉक था, जिसे अलग-अलग टेंपरेचर पर बॉयल करके रिफाइन किया जाता है। यह कैमिकल रबड़, इंक, थिनर इंडस्ट्री में इस्तेमाल होता है। गुप्ता का कहना है कि यहां कोई सेनिटाइजर नहीं बन रहा था, क्योंकि कंपनी के पास सेनिटाइजर बनाने का लाइसेंस ही नहीं है। हालांकि वे सेनिटाइजर लेकर बेचते जरूर हैं।
किसान बहादुर सिंह का ट्रैक्टर भी जला
गांव जटवाड़ के किसान बहादुर सिंह की फैक्ट्री के नजदीक ही जमीन है। रविवार शाम को वह अपने खेत में ट्रैक्टर से खेत को जुताई के लिए तैयार कर रहे थे। इसी दौरान मौसम खराब हो गया और तेज हवाएं चलने लगी। फैक्ट्री से बहादुर सिंह का घर करीब डेढ़ किलोमीटर दूर है। बहादुर सिंह ने तूफान के डर से अपना ट्रैक्टर फैक्ट्री में खड़ा कर दिया था। कुछ देर बाद ही फैक्ट्री से आग की लपटें उठती दिखाई दी। जब तक बहादुर सिंह फैक्ट्री पंहुचे ट्रैक्टर आग की लपटों से घिर चुका था। वह चाहकर भी अपने ट्रैक्टर को बचा नहीं सका। गनीमत यह रही कि फैक्ट्री के साथ लगते खेत खाली हो चुके थे। वहीं मूसलाधार बारिश ने आग को फैलने से रोके रखा।
बिजली गिरने का पता नहीं चला: सरपंच
गांव जटवाड़ के सरपंच मामराज का कहना है कि बरसात हो रही थी। बिजली चमक रही थी, लेकिन कोई धमाका सुनाई नहीं दिया। जबकि गांव से फैक्ट्री मात्र डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर है। कुछ दिन पहले कक्कड़ माजरा के एक घर पर बिजली गिरी थी जिसकी धमक जटवाड़ तक सुनाई दी थी। फायर ब्रिगेड के इंस्पेक्टर जयवीर मलिक ने भी कहा है कि बिजली गिरने के कोई तथ्य मौके से नहीं मिले हैं। फैक्ट्री में सेनिटाइजर बनाया जा रहा था या कुछ और यह तो पता नहीं, लेकिन लॉकडाउन में कई बार सुना कि फैक्ट्री में गतिविधियां चल रही हैं। फैक्ट्री संचालकों का कहना है कि फायर ब्रिगेड की एनओसी के लिए एप्लाई किया हुआ है। जबकि इंस्पेक्टर जयवीर मलिक के मुताबिक प्रदूषण विभाग की एनओसी फायर ब्रिगेड की परमिशन के बाद मिलती है। फायर ब्रिगेड अपने तौर इसकी जांच करेगा कि मंजूरी क्यों नहीं ली गई है। वहीं पुलिस का कहना है कि जांच में केमिकल स्पेशलिस्ट की राय ली जाएगी।