10 दिन बाद भी नहीं मिली पेमेंट, आढ़तियों ने जताया रोष

दैनिक भास्कर

May 04, 2020, 05:01 AM IST

फतेहाबाद. गेहूं का लदान धीमा होने के कारण आढ़तियों में रोष व्याप्त है। इतना ही नहीं उन्होंने कहा गेहूं की खरीद शुरू हुए दस दिन बीत जाने पर भी अभी तक किसी भी आढ़ती को पेमेंट नहीं मिली है। ऐसे में वे किसानों को पेमेंट कैसे दे सकते हैं। उन्होंने सरकार व प्रशासन से गुहार की है कि वह गेहूं का लदान करवाकर शीघ्र पेमेंट जारी करे।
नई व पुरानी अनाज मंंडियाें, मिर्च मंडी व एडिशनल अनाज मंडी की बात करे तो ये सभी गेहूं की बाेरियाें से अटी पड़ी हैं। इतना ही नहीं मंडिय़ों के अधिकतर शेड गेहूं की बाेरियाें से भरे पड़े हैं जिस कारण अब वहां पर गेहूं डालने की जगह नहीं बची बल्कि अब तो हालात ये बनने लगे हैं कि किसानों को अपना गेहूं अनाज मंडी के रास्तों पर डालना पड़ रहा है।
यदि कुछ दिन और गेहूं का लदान नहीं हुआ तो हालात बदतर हो सकते हैं।

मार्केट कमेटी सचिव को आढ़तियों ने बताईं समस्याएं
गेहंू के लदान को लेकर पुरानी अनाज मंडी के कई आढ़तियों ने मार्केट कमेटी सचिव सतवीर सिंह से मिलकर गेहूं का लदान तुरंत करवाने की मांग की। उन्होंने कहा कि जब तक गेहूं का लदान नहीं होगा उन्हें सरकार की ओर से पेमेंट नहीं मिलेगी और वे किसानों को पेमेंट नहीं कर पाएंगे। दूसरा लदान न होने के कारण अब अनाज मंडिय़ों में जगह कम पड़ने लगी है। उन्होंने कहा कि यदि कुछ समय गेहूं का लदान नहीं हुआ तो बाेरियाें में पड़ी पड़ी गेहूं की नमी कम होने से उसमें घटौती होगी जिसके लिए संबंधित खरीद एजेंसियां आढ़ती को शॉर्टेज के नाम पर परेशान करेंगी।

पोर्टल के अनुसार 1 लाख 67108 क्विंटल का लदान
मार्केटिंग बोर्ड के पोर्टल के अनुसार टोहाना मार्केट कमेटी के अधीन सभी अनाज मंडिय़ों, खरीद केंद्रों व अस्थाई खरीद केंद्रों में अब तक 3 लाख 67108 क्विंटल गेहूं की खरीद की जा चुकी है जिसमें से 1 लाख 55282 क्विंटल गेहूं का लदान हो चुका है लेकिन शहर की अनाज मंडिय़ों से लदान कम होने के कारण आढ़तियों को अधिक परेशानी हो रही है।

सरकार के शेड्यूल के अनुसार कर रहे पेमेंट
सरकारी खरीद एजेंसी हैफेड के एमडी दर्शन आहूजा ने कहा कि 23 अप्रैल से खरीद शुरू हुई थी। उन्होंने कहा कि सरकार के शेड्यूल मुताबिक पेमेंट की जा रही है।

समाधान करना चाहिए कच्चा आढ़ती एसो. प्रधान तरसेम ने कहा कि इस बारे में सरकार को सोचना चाहिए क्योंकि पेमेंट पर ही सारा व्यापार आधारित है।