हाथरस गैंगरेप: पुलिस ने पीड़ित की लाश घर नहीं ले जाने दी, रात में खुद ही शव जला दिया; पिता बोले- आखिरी बार चेहरा भी नहीं देखने दिया, पता नहीं किसे जलाया

हाथरस गैंगरेप: पुलिस ने पीड़ित की लाश घर नहीं ले जाने दी, रात में खुद ही शव जला दिया; पिता बोले- आखिरी बार चेहरा भी नहीं देखने दिया, पता नहीं किसे जलाया
पुलिस पर आरोप है कि अंतिम संस्कार के दौरान पीड़ित परिवार के एक भी सदस्य को मौजूद नहीं रहने दिया, बल्कि पुलिस ने खुद ही लाश जला दी।
  • मोदी ने योगी से कहा- दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें, सरकार ने 3 सदस्यों की एसआईटी बनाकर 7 दिन में रिपोर्ट देने को कहा
  • परिजन बोले, पुलिस अब कह रही है कि उसकी जीभ नहीं कटी थी, रीढ़ की हड्डी नहीं टूटी थी, पुलिस इस मामले को निपटा देना चाहती है, पुलिस हमारे साथ भी कुछ भी कर सकती थी
  • भाई ने कहा- हम किसी तरह गांव में गुजारा कर रहे थे, भैंस पाल कर अपना खर्च चला रहे थे, पुलिस ने गांव में रहने का रास्ता भी बंद कर दिया है, हमें अब यहां से जाना पड़ेगा

      हाथरस में कथित गैंगरेप पीड़ित का बीती रात पुलिस ने अंतिम संस्कार कर दिया। परिजन का आरोप है कि पुलिस ने जबर्दस्ती अंतिम संस्कार किया और उन्हें आखिरी बार चेहरा तक नहीं देखने दिया गया। पीड़ित के भाई ने भास्कर से बात करते हुए कहा, ‘पुलिस ने हमें उसका चेहरा तक नहीं देखने दिया। हमें नहीं पता पुलिस ने किसे जलाया।

उन्होंने पुलिस पर अपने रिश्तेदारों के साथ मारपीट करने और उन्हें गांव पहुंचने से रोकने का आरोप भी लगाया। पीड़ित के बड़े भाई ने कहा, 'महिला पुलिसकर्मियों ने हमारे घर की महिलाओं के साथ मारपीट की। रिश्तेदारों को गांव तक नहीं आने दिया। जबर्दस्ती रात में ही अंतिम संस्कार कर दिया। हम उनसे कहते रहे कि कम से कम सुबह होने के इंतजार करें, लेकिन हमारी एक नहीं सुनी। उन्होंने तो हमारे रीति-रिवाजों तक का ख्याल नहीं रखा।

पीड़ित का परिवार अब पुलिस पर मामले को किसी भी तरह निपटाने का आरोप लगा रहा है। बताया, 'पुलिस अब कह रही है कि उसकी जीभ नहीं कटी थी, रीढ़ की हड्डी नहीं टूटी थी। वे किसी भी तरह इस मामले को निपटा देना चाहते हैं। पुलिस ने अभी तक गैंगरेप किए जाने की पुष्टि भी नहीं की है। मीडिया को भी गांव में नहीं आने दिया जा रहा है, हमसे बात नहीं करने दी जा रही है। वो तो किसी तरह कुछ पत्रकार पहुंच गए। नहीं तो हमारे साथ भी कुछ भी हो सकता था।'

भाई ने कहा, 'हम किसी तरह गांव में गुजारा कर रहे थे। भैंस पाल कर अपना खर्च चला रहे थे। अब पुलिस ने हमारे लिए गांव में रहने का रास्ता भी बंद कर दिया है। हमें अब इस गांव से पलायन करना पड़ेगा। पुलिस ऐसे अत्याचार करेगी तो हम दबंगों के बीच कैसे रह पाएंगे।

परिजन का कहना है कि उन्हें लड़की की मेडिकल रिपोर्ट की कॉपी तक नहीं दी गई। हाथरस के पुलिस अधीक्षक विक्रांत वीर का कहना है कि मेडिकल रिपोर्ट में अभी ये स्पष्ट नहीं है कि पीड़ित के साथ रेप हुआ या नहीं। वहीं सफदरजंग अस्पताल में बीती रात प्रदर्शन कर रहे आजाद समाज पार्टी के नेता चंद्रशेखर को हिरासत में ले लिया गया था।

कैसे हुआ अंतिम संस्कार

पंद्रह दिन पहले कथित गैंगरेप का शिकार हुई पीड़ित की सोमवार रात करीब तीन बजे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में मौत हो गई थी। मंगलवार शाम पीड़ित के परिजन अस्पताल में ही धरने पर बैठ गए थे। रात में यूपी पुलिस उन्हें अपनी गाड़ी से हाथरस ले गई। पुलिस ने बीती रात करीब ढाई बजे गांव में लड़की का अंतिम संस्कार कर दिया। पत्रकारों और परिजन को दूर रखने के लिए पुलिस ने मानव श्रृंखला बना ली थी। किसी को भी अंतिम संस्कार वाली जगह के पास नहीं जाने दिया था। गांव वालों का कहना है कि ऐसा करके पुलिस ने रीति-रिवाजों का उल्लंघन किया है।

पीड़ित के शव को जब अंतिम संस्कार करने के लिए ले जाया जा रहा था तो गांववालों ने वाहन को रोकने की कोशिश की थी। कुछ लोग गाड़ी के बोनट से भी चिपक गए थे, लेकिन पुलिस वाले उन्हें हटाते हुए वाहन को अंतिम संस्कार स्थल तक ले गए और जल्दबाजी में अंतिम संस्कार कर दिया।

पुलिस की भूमिका पर सवाल

पीड़ित के परिजन पुलिस पर मामलों को रफा-दफा करने का आरोप लगा रहे हैं। उनका कहना है कि पुलिस ने जल्दबाजी में अंतिम संस्कार कर उसके दोबारा पोस्टमॉर्टम की संभावना को ही खत्म कर दिया। पीड़ित के भाई ने कहा कि हम दलित हैं इसलिए ये जबर्दस्ती की जा रही है। पहले बहन का गैंगरेप किया गया, फिर अपराधियों को गिरफ्तार करने में कोताही की गई और अब अंतिम संस्कार के दौरान ये सब किया गया। अब हमारे लिए सभी रास्ते बंद किए जा रहे हैं, गांव से पलायन करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से फोन पर बात की है।

परिजन और पुलिस के बीच झड़प
रात को जब पीड़ित का शव एंबुलेंस से गांव लाया गया तो परिवार वालों ने हंगामा शुरू कर दिया। वे शव सौंपने की मांग कर रहे थे, लेकिन प्रशासन अंतिम संस्कार की जल्दबाजी में था। परिवार वाले एंबुलेंस के सामने भी लेट गए। इस दौरान प्रशासन और ग्रामीणों के बीच झड़प भी हुई। आरोप है कि एडीएम ने परिवार वालों से बदसलूकी की। परिवार वाले रात में अंतिम संस्कार नहीं करना चाहते थे, लेकिन शव को जबरन जला दिया गया। इस दौरान मीडिया को भी दूर रखा गया। लाश जलाने में पेट्रोल का इस्तेमाल करने की आशंका जताई जा रही है।

परिजन का सवाल- एम्स की बजाय सफदरजंग क्यों ले गए?
पीड़ित के भाई ने कहा, "बहन को अलीगढ़ के जेएन मेडिकल कॉलेज से दिल्ली एम्स रैफर किया गया था, लेकिन उसे सफदरजंग अस्पताल में भर्ती किया गया। अगर सही वक्त पर इलाज मिल गया होता तो बहन जिंदा होती।"

पूरा मामला क्या है?
आरोपों के मुताबिक हाथरस जिले के थाना चंदपा इलाके के एक गांव में 14 सितंबर को चार लोगों ने 19 साल की दलित युवती से दुष्कर्म किया था। वारदात के बाद आरोपियों ने पीड़ित की रीढ़ की हड्डी तोड़ दी और उसकी जीभ काट दी। दिल्ली में इलाज के दौरान पीड़ित की मौत हो गई। इस मामले में चारों आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं। हालांकि, पुलिस का दावा है कि गैंगरेप और जीभ काटने के आरोप गलत हैं।