पीजीआई रोहतक में कोरोना वैक्सीन के ट्रायल के तीसरे चरण को मिली मंजूरी, 1200 वॉलंटियर्स को दी जाएगी दवा की डोज।

पीजीआई रोहतक में कोरोना वैक्सीन के ट्रायल के तीसरे चरण को मिली मंजूरी, 1200 वॉलंटियर्स को दी जाएगी दवा की डोज।

देशभर में 26 हजार वॉलंटियर्स को दी जाएगी को-वैक्सीन।

पीजीआई रोहतक को कोरोना की को-वैक्सीन ट्रायल के तीसरे चरण को सरकार की ओर से मंजूरी मिल गई है। पीजीआई में वैक्सीन ट्रायल के 2 चरण पूरे हो चुके हैं। इसमें किसी भी मरीज में दवा के साइड इफेक्ट नहीं मिले। इसी आधार पर सरकार ने देशभर में दवा ट्रायल के तीसरे चरण को मंजूरी दी है। पीजीआई में तीसरे फेज के ट्रायल की तैयारी अंतिम चरण में हैं। देशभर में 26 हजार वाॅलंटियर्स पर को-वैक्सीन का ट्रायल किया जाना प्रस्तावित है। पीजीआई में क्लीनिकल ट्रायल के लिए गठित टीम हेल्थ केयर वर्कर और क्रोनिक पेशेंट सहित पीजीआई में करीब 1200 वॉलंटियर्स को शामिल किया गया है। पीजीआईएमएस की ट्रायल कमेटी की प्रिंसिपल इन्वेस्टीगेटर डॉ. सविता वर्मा, को-इंवेस्टीगेटर डॉ. रमेश वर्मा, स्टेट नोडल अधिकारी डॉ. ध्रुव चौधरी अब बायोटेक कंपनी की ओर से ट्रायल की अनुमति मिलने का इंतजार कर रहे हैं। कमेटी के सदस्य बताते हैं कि इसी सप्ताह उच्चस्तरीय मीटिंग में प्लानिंग पर मंथन कर अंतिम निर्णय लिए जाएंगे।
दो चरण में 130 वाॅलंटियर्स में बढ़ा था एंटीबॉडी लेवल : पीजीआई में दो चरण के ट्रायल में शामिल हुए 130 वाॅलंटियर्स में वैक्सीन की डोज दिए जाने के बाद उनमें एंटीबॉडी लेवल बढ़ा हुआ पाया गया। इसी आधार पर वैक्सीन को सफल मानते हुए डीसीजीआई ने हैदराबाद की भारत बायोटेक कंपनी को तीसरे चरण के ट्रायल शुरू करने को मंजूरी दे दी है।

16 महिलाओं समेत 80 किशोर, युवा और बुजुर्गों को नहीं हुआ कोरोना
दूसरे चरण के को-वैक्सीन के ट्रायल में शामिल 16 महिलाओं सहित किशोर, 80 युवा और बुजुर्गों को वैक्सीन डोज दिए जाने के बाद चिकित्सकों की ओर से उनकी हेल्थ मॉनीटरिंग की गई। डाॅ. रमेश वर्मा ने बताया कि चार माह के अंतराल में एक भी वॉलंटियर कोरोना संक्रमण से ग्रस्त नहीं हुआ और न ही उनमें कोरोना वैक्सीन का कोई साइड इफेक्ट पाया गया है।

दवा के पहले चरण में 50 और दूसरे चरण में 80 वाॅलंटियर्स हुए थे शामिल
डॉ. रमेश वर्मा ने बताया कि पहले चरण में 80 और दूसरे चरण में 50 वाॅलंटियर्स को वैक्सीन की दो-दो डोज दी जा चुकी हैं। सभी के सैंपल कलेक्ट कर दिल्ली की लैब में एंटीबॉडी लेवल टेस्ट किए गए। हालांकि डीसीजीआई की ओर से आधिकारिक रिपोर्ट के बारे में जानकारी नहीं दी गई है। दूसरे चरण के ट्रायल में 12 साल के किशोर से लेकर 65 साल तक के बुजुर्गों को शामिल किया गया था। अब तीसरे चरण के ट्रायल में हेल्थ केयर वर्कर और क्रॉनिक मरीजों को शामिल करने की प्लानिंग है। सब ठीक रहा तो बड़ी सफलता मिलेगी।