एमआईई बहादुरगढ़ में ठेकेदार के पत्र भेजने के बाद भी पेमेंट व टाइम एक्सटेंशन न मिलने से 32 करोड़ का काम ठप

एमआईई बहादुरगढ़ में ठेकेदार के पत्र भेजने के बाद भी पेमेंट व टाइम एक्सटेंशन न मिलने से 32 करोड़ का काम ठप

     आधुनिक औद्योगिक क्षेत्र (एमआईई) के पार्ट ए व बी में 32.60 करोड़ का काम आठ अगस्त 2018 को शुरू हुआ, काम बार-बार ठप के बाद अब पूरी तरह से बंद करने के लिए निर्माण कंपनी ने एचएसआईआईडीसी को पत्र जारी करके काम बंद करने की अधिकारिक सूचना दे दी है। कंपनी ने अब तक का काम पूरा करने के साथ-साथ विभाग को पेमेंट जारी करने को भी कहा है व भविष्य में काम नहीं करने की तौबा की है।

कंपनी ने कहा कि जो काम 15 माह में पूरा होना था वह अधिकारियों की लापरवाही व समय-समय पर कार्रवाई नहीं करने के कारण दो साल में यहां तक पहुंच पाया है। यहां स्थिति यह है कि बहादुरगढ़ में काम करने के लिए सरकार को तीन बार टेंडर रि-प्रब्लिश करना पड़ा था तो तब जाकर बाहर की कंपनी से यहां काम एमआईई की खस्ता हाल स्थिति के बाद भी इसे संवारने का जाेखिम उठा लिया। पर अब वह कंपनी भी हाथ जोड़कर यहां से वापस भागने की फिराक में है।

कंपनी का कहना है कि उन्हें बहादुरगढ़ के काम में भारी नुकसान हुआ है इसी कारण वह काम से पीछे हट रहे है। यहां अधिकारियों की लालफीताशाही के कारण यहां सीएम एनाउसमेंट के काम का यह हाल है। विभाग व निर्माण कंपनी दोनों के बीच में फंसे एनआईई के 2200 फैक्ट्रियों के संचालकों के सामने दीपावली का सीजन तक पिटता नजर आ रहा है। कंपनी काम करना बंद करके मामले मे अदालत में जाने पर भी विचार कर रही है। वहीं अधिकारियों व निर्माण कंपनी के बीच पेमेंट को पास करने में चल रहे विवाद के कारण फैक्ट्रियों में काम कर रहे लोगों के सामने कूड़े करकट व सड़कों पर जमा पानी भरे प्रदूषण से निकलते हुए फैक्ट्रियों तक जाने को मजबूर होना पड़ रहा है।

सड़काें व सीवराें का काम पूरा न हाेने से कंपनियों के प्रतिनिधि नहीं पहुंच रहे फैक्ट्री

फैक्ट्रियों के संचालकों का कहना है इस बार दो साल से कभी प्रदूषण के कारण फैक्ट्री के जनरेटर बंद तो कभी नोटबंदी के कारण श्रमिकों का पलायन। फिर कोरोना में कमर टूट गई और अब यहां तैयार हो रहे सड़कों व सीवर का काम पूरा नहीं होने के चलते कंपनियों के प्रतिनिधियों के फैक्ट्री क्षेत्र में पहुंचने का सिलसिला भी करीब-करीब बंद होने के कगार पर है। इससे सबसे अधिक परेशानी यहां लगी फैक्ट्रियों को हो रही है। काम के चलते प्रदूषण के कारण श्रमिको के बीमार होने का खतरा अलग से बना हुआ है।