उपचार ना मिलने से सिविल अस्‍पताल में कोरोना पॉजिटिव की मौत मामले को दबाने में जुटा स्वास्थ्य विभाग

उपचार ना मिलने से सिविल अस्‍पताल में कोरोना पॉजिटिव की मौत मामले को दबाने में जुटा स्वास्थ्य विभाग

हांसी/हिसार। सिविल अस्पताल में कोरोना पॉजिटिव को समय पर उपचार ना मिलने के बाद हुई मौत के मामले को दबाने में स्वास्थ्य विभाग लग गया है। स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार आला अधिकारी इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं। हालांकि सीएमओ की तरफ से अस्पताल प्रशासन ने मामले में स्पष्टीकरण मांगा गया है लेकिन अस्पताल सूत्रों के मुताबिक इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात डाक्टर की जांच करने के बजाए निचले स्तर के कर्मचारियों से जवाब मांगा जा रहा है।

बता दें कि बीते हफ्ते सिविल अस्पताल में कोरोना टेस्ट करवाने आए एक अधेड़ा की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई थी। मृतक के बेटे का आरोप है कि करीब दो घंटे तक उसके पिता अस्पताल में इलाज ना मिलने के कारण तड़पते रहे लेकिन किसी डाक्टर ने नहीं संभाला। इमरजेंसी में तैनात महिला डाक्टरों की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। वहीं, दोषी डाक्टरों पर कार्रवाई करने के बजाए अस्पताल प्रशासन उन्हें बचाने में जुटा हुआ है। अस्पताल सूत्रों की माने तो सीएमओ को भेजने के लिए जो जवाब तैयार किया गया है उसमें वास्तविक तथ्यों का जिक्र ही नहीं किया गया है। उधर, मृतक के बेटे ने कहा कि इस मामले में बुधवार को स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज व अन्य अधिकारियों को शिकायत करेंगे व मामले में दोषी डाक्टरों पर कार्रवाई की मांग करेंगे।

ओपीडी पर्ची पर ट्रीटमेंट का जिक्र ही नहीं

सिविल अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीज की ओपीडी पर्ची पर उसे दिए जाने वाले उपचार का विवरण होता है। जबकि कोरोना संक्रमित मरीज के बेटे ने जो पर्ची दिखाई है उसके अनुसार कोई उपचार नहीं दिया गया। यही नहीं रेफर करने के बारे में भी ओपीडी स्लिप पर कोई नोट नहीं लिखा हुआ। इससे जाहिर होता है तो डाक्टरों द्वारा इस मामले में कितनी बड़ी लापरवाही बरती गई है। इससे ये बात भी जाहिर होती है कि ड्यूटी पर तैनात डाक्टरों द्वारा समय पर बुजुर्ग को ट्रीटमेंट नहीं दिया गया।

पिता पहल से बीमार थे तो क्या ट्रीटमेंट नहीं दोगे

डाक्टरों द्वारा कहा गया कि उनके पिता पहले से बीमार थे। मेरा सवाल है कि मरीज बीमार है तो उसका उपचार करने की जिम्मेदार तो डाक्टर की है ना। मामले को दबाने के लिए ऐसे सवाल किए जा रहे हैं। मेरे पिता की मौत डाक्टरों की लापरवाही के कारण हुई है। हम इस मामले में पिछे नहीं हटेंगे व दोषी डाक्टर पर कार्रवाई की हम मांग करते हैं।

- जैसे की मृतक के बेटे ने बताया

एसएमओ का फोन बंद, सीएमओ ने नहीं दिया जवाब

मामले में स्टेट्स रिपोर्ट जानने के लिए सीएमओ से लेकर एसएमओ व डिप्टी सिविल सर्जन से संपर्क करने की कोशिश की गई। एसएमओ मंगलवार को अस्पताल में ड्यूटी पर नहीं आए और सीएमओ की तरफ से कई बार फोन कॉल व मैसेज भेजने के बावजूद कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई। संवेदनशील मामले में भी डाक्टरों का इस प्रकार का रवैया हैरान करने वाला है।