इनेलो को मान्यता की फाइल चुनाव आयोग में हुई गुम, RTI के तहत जानकारी देने से हाथ खड़े किए

चुनाव आयोग से सूचना के अधिकार के तहत इंडियन नेशनल लोक दल (इनेलो) के बारे में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने तीन बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी लेकिन इनेलो की फाइल चुनाव आयोग को मिल नहीं रही है।

इनेलो को मान्यता की फाइल चुनाव आयोग में हुई गुम, RTI के तहत जानकारी देने से हाथ खड़े किए

चंडीगढ़। क्षेत्रीय दल के रूप में मान्यता प्राप्त इंडियन नेशनल लोक दल (इनेलो) की फाइल चुनाव आयोग को मिल नहीं रही है। सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी के जवाब में आयोग ने माना है कि मान्यता संबंधी आधिकारिक रिकार्ड वर्तमान में ट्रेस (उपलब्ध) नहीं हो पा रहा है।

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने 19 अगस्त को आयोग के पास आरटीआइ याचिका लगाकर तीन बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी। पहली यह कि किस वर्ष, माह और तारीख को आयोग द्वारा इनेलो को मान्यता प्राप्त राज्य दल का दर्जा दिया गया। किस लोकसभा चुनाव या विधानसभा चुनाव में प्रदर्शन के आधार पर इनेलो को राज्य दल का दर्जा दिया गया। इन दोनों बिंदुओं पर आयोग के केंद्रीय जन सूचना अधिकारी (सीपीआइओ) एवं अंडर सेक्रेटरी विनोद कुमार ने जवाब दिया है कि उनके रिकार्ड में इस संबंध में फाइल ट्रेस नहीं हो पा रही है। जब भी फाइल उपलब्ध होगी, याचिकाकर्ता को सूचना दे दी जाएगी।

एडवोकेट हेमंत ने बताया कि नियमानुसार किसी भी राजनीतिक पार्टी को राज्य दल का दर्जा देने के लिए विधानसभा चुनावों में न्यूनतम छह फीसद वोट और दो विधानसभा सीटें जीतनी जरूरी हैं। अन्यथा विधानसभा की कुल सीटों की न्यूनतम तीन फीसद सीटें या तीन सीटें, जो भी अधिक हों, जीतनी जरूरी होती हैं।

कोई सीट न जीतकर भी कोई पार्टी कुल पड़े वैध वोटों का आठ फीसद हासिल करने पर भी राज्य दल के रूप में मान्यता मिल सकती है। इसी तरह लोकसभा चुनाव में न्यूनतम छह फीसद वोट और एक सीट जीतना आवश्यक है। ऐसा नहीं होने पर कुल वैध वोटों का आठ फीसद हिस्सा पार्टी को मिलना चाहिए।

मान्यता को अभी नहीं कोई खतरा

लोकसभा और विधानसभा चुनाव में निर्धारित मानकों से कम वोट लेने के बावजूद नए नियमों के चलते इनेलो की मान्यता को कोई खतरा नहीं है। अगस्त 2016 में चुनाव आयोग द्वारा बनाए गए नए नियमों के अनुसार दो लोकसभा चुनावों और दो विधानसभा चुनावों में प्रदर्शन के आधार पर ही संबंधित पार्टी की मान्यता पर फैसला किया जा सकता है।